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4 Oct 2020

Hindi Grammar Practice Set-7

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image: Hindi Grammar Practice Set @ TeachMatters

Here is Hindi Grammar Practice Set-7 (हिन्दी व्याकरण प्रैक्टिस सेट-7) based on Hindi grammar objective multiple choice questions with answers for all competitive exams.

11 Jun 2020

General Hindi Grammar Question-Answers for Competitive Exams - सामान्य हिंदी व्याकरण प्रश्नोत्तर यहाँ देखें

Grammar >> Hindi Grammar >> General Hindi Grammar Questions >>
(Latest Updated : 11.06.2020). Check General Hindi Grammar Questions with Answers for all Competitive examinations like CTET, HTET, UPTET, BTET, RTET, HPTET, PSTET & other TET Exams 2020-21. Candidates who are appearing in upcoming written exams for PRT, TGT, PGT & other Teacher Recruitment tests can practice हिंदी व्याकरण) Hindi Grammar objective type questions with answers based on Multiple Choice Question Pattern.
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Here we provide important question-answers on Hindi Grammar which include स्वर-व्यंजन, वचन, लिंग, समास, संधि, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अलंकार, मुहावरे, लोकोक्ति, कारक इत्यादि topics. General Hindi questions (सामान्य हिंदी प्रश्न) also include Hindi Literature Objective MCQs (हिंदी साहित्य वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर). These questions are also beneficial for those candidates who are preparing for SSC, Bank and other examinations based on objective questions. Hindi Grammar important questions and answers can be checked here.

31 May 2020

Hindi Grammar Practice Set - 6

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/UP TET Exams.

image : Hindi Grammar Practice Set @ TeachMatters

हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Grammar/Vyakaran Practice Set

Hindi Grammar Practice Sets for HTET Level - 1, 2 & 3 (JBT, TGT & PGT)

Hindi Grammar Practice Sets for CTET Paper - 1 & 2 (PRT & TGT)

4 Nov 2015

Hindi Grammar : Practice Set - 5

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/UP TET Exams.

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हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Grammar/Vyakaran Practice Set

Hindi Grammar Practice Sets for HTET Level - 1, 2 & 3 (JBT, TGT & PGT)

Hindi Grammar Practice Sets for CTET Paper - 1 & 2 (PRT & TGT)

12 Aug 2015

Hindi Grammar : Practice Set - 4

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/TET Exams >> Hindi Grammar Practice Sets >>

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हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Grammar/Vyakaran Practice Set


Hindi Grammar Practice Sets for CTET/UPTET Level - 1 & 2 Part -II Language (Hindi)

11 Aug 2015

स्वर संधि : हिंदी व्याकरण

हिंदी व्याकरण > संधि > स्वर संधि 


स्वर संधि
दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर-संधि कहते हैं। जैसे - विद्या + आलय = विद्यालय।
स्वर + स्वर : स्वर, जैसे –
आ + ई = ए (रमा + ईश = रमेश)
स्वर संधि के पाँच भेद हैं – दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि और अयादी संधि ।

संधि और उसके भेद : हिंदी व्याकरण

हिंदी व्याकरण > संधि > संधि के भेद > स्वर संधि > व्यंजन संधि > विसर्ग संधि


संधि और उसके भेद
संधि : संधि शब्द का अर्थ है – मेल या मेल-मिलाप । दो समीपवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के मेल से होने वाला परिवर्तन संधि कहलाता है, जैसे –
हाथ + कड़ी = हथकड़ी, नर + ईश = नरेश, उत् + लास = उल्लास, सत् + जन = सज्जन ।
संधि प्रायः दो तत्वों या घटकों के बीच होती है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि संधि दो ध्वनियों के बीच होती है न कि शब्दों के बीच।

31 Jul 2015

Hindi Grammar : Practice Set - 3

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/UP TET Exams.

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हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Vyakaran Practice Set


Hindi Grammar Practice Sets for HTET Level - 1, 2 & 3 Part -II Language - I (Hindi)

Hindi Grammar : Practice Set - 2

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/HP TET & REET Exams.

image : Hindi Grammar Practice Set @ TeachMatters

हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Vyakaran Practice Set


Hindi Grammar Practice Sets for HTET Level - 1, 2 & 3 Part -II Language - I (Hindi)

28 Jul 2015

Hindi Grammar : Practice Set - 1

Practice Sets >> Practice Sets for CTET/HTET/UP TET & Other Exams.

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हिंदी व्याकरण प्रैक्टिस सेट /Hindi Vyakaran Practice Set


Hindi Grammar Practice Sets for HTET Level - 1, 2 & 3 Part -II Language - I (Hindi)

15 Jan 2014

स्वर और व्यंजन : हिन्दी व्याकरण

(Last Updated : 14.12.19)

हिन्दी व्याकरण >> स्वर और व्यंजन (Swar Aur Vyanjan)


हिंदी वर्णमाला में वर्णों को दो भागों में बाँटा गया है - १. स्वर २. व्यंजन।

स्वर और उसके भेद / प्रकार


स्वर : जिन वर्णों का स्वतंत्र उच्चारण किया जा सके या जिन ध्वनियों के उच्चारण के समय हवा बिना किसी रुकावट के निकलती है, वे स्वर कहलाते हैं, जैसे – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, (ऋ), ए, ऐ, ओ, औ, (ऑ)।
यहाँ उल्लेखनीय है कि हिन्दी में उच्चारण की दृष्टि से स्वर नहीं है, लेखन की दृष्टि से   स्वर है । इसी प्रकार  अंग्रेजी के डॉक्टर, कॉलेज, नॉलेज आदि शब्दों में उच्चारण के कारण स्वर के रूप में प्रचलित हो गया है । अतः ऑ  उच्चारण की दृष्टि से स्वर है ।

14 Jan 2014

अनेकार्थी शब्द : हिन्दी व्याकरण

हिन्दी व्याकरण >> अनेकार्थी शब्द


(Last Updated : 15.08.15) हिन्दी भाषा में ऐसे कई शब्द हैं जिनके कई अर्थ निकलते हैं । ये शब्द विभिन्न परिस्थतियों में भिन्न-भिन्न अर्थ देते हैं । ऐसे शब्दों को अनेकार्थी शब्द कहते हैं । यहाँ ऐसे ही शब्द दिए गए हैं :

  1. अंबर : वस्त्र, आकाश, कपास
  2. अनंत : आकाश, ईश्वर, विष्णु, शेष नाग
  3. अपेक्षा : आवश्यकता, तुलना में, आशा के अर्थ में
  4. अब्ज : शंख कमल, कपूर, चंद्रमा
  5. अब्धि : सरोवर, समुद्र
  6. अरुण : प्रातः कालीन सूर्य, सूर्य का सारथि, सिंदूर, रक्तवर्ण
  7. अलि : भौंरा, सखि, कोयल
  8. उत्सर्ग : त्याग, दान, समाप्ति
  9. कनक : सोना, धतूरा, गेहूँ
  10. कर : हाथ, हठी की सूॅँड, किरण, टैक्स, करना 
  11. कुल : वंश, सब
  12. तीर : किनारा, बाण
  13. पद : चरण, शब्द, ओहदा, कविता का चरण
  14. विजया : दुर्गा, भाँग
  15. विधि : ब्रह्मा, रीति
  16. श्रुति : वेद, कान
  17. संज्ञा : नाम, चेतना
  18. पय : दूध, पानी
  19. वर्ण : अक्षर, रंग, जाति
  20. उत्सर्ग : त्याग, समाप्ति, दान
  21. गुरु : शिक्षक, भरी, बड़ा, चालाक
  22. मत : राय, संप्रदाय, नहीं
  23. मुद्रा : सिक्का, मोहर, मुख का भाव
  24. ठाकुर : स्वामी, देवता, क्षत्रिय, नाई
  25. अभिजात : कुलीन, पूज्य, मनोहर

अलंकार : हिन्दी व्याकरण

अलंकार और उसके भेद : हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar)

(Last Updated : 29.11.2018).

अलंकार : अलंकार शब्द का शाब्दिक अर्थ है आभूषण या गहना । जिस प्रकार स्त्री के सौन्दर्य वृद्धि में आभूषण सहायक होते हैं , उसी प्रकार काव्य में प्रयुक्त होने वाले अलंकार शब्दों एवं अर्थो की सुन्दरता में वर्द्धि करके चमत्कार उत्पन्न करते हैं ।

प्रमुख अलंकार :
1. अनुप्रास : व्यंजन वर्णों की आवृति एक या दो से अधिक बार होती है ।

उदाहरण – कल कानन कुंडल मोरपखा उर पी बनमाल बिराजति है 
2. यमक : एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए और उसका अर्थ हर बार भिन्न हो ।
उदाहरण : काली घटा का घमण्ड घटा 
घटा = वर्षा काल में आकाश के उमड़ने वाली मेघमाला ।
घटा = कम हुआ।
3. श्लेष : शब्द का अधिक अर्थ में एक ही बार प्रयोग ।
 उदाहरण : मधुवन की छाती को देखो,
                 सूखी कितनी इसकी कलियाँ 
कलियाँ : खिलने से पूर्व फूल की दशा ।
कलियाँ : यौवन पूर्व की दशा ।
4. उपमा : एक वस्तु या प्राणी की तुलना अत्यंत सादृश्य के कारण प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाए ।
उदाहरण : हाय फूल-सी कोमल बच्ची । हुई राख की थी ढेरी ।।
उपमा के चार तत्व होते हैं –
(क)   उपमेय : वह वस्तु या प्राणी जिसकी उपमा दी जाए ।
(ख)  उपमान : वह प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी जिसके साथ उपमेय की तुलना की जाए ।
(ग)   साधारण धर्म : उपमेय तथा उपमान में पाया जाने वाला परस्पर समान गुण ।
(घ)   वाचक शब्द : वे शब्द जो उपमेय और उपमान में पाए जाने वाले गुण को प्रकट करते हैं –ज्यों, जैसा, तुल्य, सा, सी, सरिस आदि ।

5. रूपक : जहाँ गुण की अत्यंत समानता  के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोपण हो ।
उदाहरण : मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों ।
यहाँ चन्द्रमा (उपमेय) में खिलौना (उपमान) का आरोप है ।
6. उत्प्रेक्षा : जहाँ समानता के कारण उपमेय में संभावना या कल्पना की जाए ।
मानो, मनु, मनहु, जानो, जनु, जनहु आदि इसके बोधक शब्द हैं ।
उदाहरण : कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए ।
                   हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए ।
7. अतिशयोक्ति : जहाँ उपमेय का वर्णन लोक सीमा से अधिक बढाकर किया जाए ।
उदाहरण : आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार ।
                   राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार ।
8. अन्योक्ति : जहाँ उपमान (अप्रस्तुत) के वर्णन के माध्यम से उपमेय (प्रस्तुत) का वर्णन किया जाए ।
 उदाहरण : जिन दिन देखे वे कुसुम, गई सु बीती बहार ।
                   अब, अलि रही गुलाब में, अपत कँटीली डार ।

समास : हिन्दी व्याकरण

समास और उसके भेद : हिन्दी व्याकरण

(Last Updated : 29.11.2018).
हिन्दी भाषा में शब्दों की रचना कई विधियों से होती है जिसमे से एक रचना विधि है - समास रचना । समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे - पुस्तक + आलय = पुस्तकालय ।

समास : समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक) अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं, जैसे – गंगा+जल = गंगाजल ।
समास रचना में प्रायः दो पद  (शब्द) होते हैं – पहले पद को पूर्वपद (जैसे – गंगा) और दूसरे को उत्तर पद(जैसे – जल) कहते हैं । समास रचना से बने शब्द को समस्त पद (जैसे – गंगाजल) कहते हैं ।

समास विग्रह

समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) को अलग-अलग करने को समास विग्रह कहते हैं, जैसे – गंगाजल = गंगा+जल । अन्य उदाहरण  - चंद्रमुख = चन्द्र-सा मुख ।
समास के भेद :
समास के चार प्रमुख भेद हैं -
(1)  तत्पुरुष समास
(2)  कर्मधारय समास
(3)  द्विगु समास
(4)  बहुब्रीहि समास

इसके अतिरिक्त दो अन्य भेद (कर्मधारय और द्विगु) भी प्रचलित हैं, यद्यपि ये दोनों भेद तत्पुरुष समास के ही उपभेद हैं । इस प्रकार समास के कुल छह भेद हैं जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है :

(1)  तत्पुरुष समास – इस समास में पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान होता है, जैसे – राजकुमार (राजा का कुमार) ।
अन्य उदाहरण : पुस्तकालय, क्रीडाक्षेत्र, घुड़सवार, रसोईघर, हस्तलिखित, वाल्मिकिरचित, सूखापीडित, पथभ्रष्ट, आपबीती, देशवासी, पनचक्की, मालगाड़ी, रेलगाड़ी, दहीबड़ा, बनमानुष ।
इस समास के दो प्रमुख उपभेद हैं – कर्मधारय और द्विगु ।
(2)  कर्मधारय समास – इसमें पूर्वपद विशेषण होता है और उत्तर पद विशेष्य, जैसे – नीलगाय = नील (विशेषण) + गाय (विशेष्य) नीली गाय । अन्य उदाहरण – पीताम्बर, महादेव, कमलनयन, घनश्याम, मुखचन्द्र ।
(3)  द्विगु समास – यह एक प्रकार का कर्मधारय समास है जहाँ विशेषण कोई संख्या है; अर्थ की दृष्टि से यह समास प्रायः समूहवाची होता है, जैसे – तिराहा = ति (तीन) + राहा । अन्य उदाहरण – चौमासा, पंचवटी, शताब्दी, त्रिशूल, त्रिनेत्र ।
(4)  बहुब्रीहि समास – इस समास में न तो उत्तर पद प्रधान होता है और न ही पूर्वपद प्रधान होता है । यहाँ दोनों गौण (उत्तर पद और पूर्वपद) एक तीसरे प्रधान के संबंध में कहते हैं, जो संदर्भ से प्रकट होता है । जैसे – पीताम्बर = पीत+अम्बर (पीला कपडा), लेकिन संदर्भ से यह कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुआ है – पीला है कपडा जिसका वह (कृष्ण) । यहाँ दोनों पद गौण हैं, प्रधान तीसरा पद कृष्ण है । अन्य उदाहरण – नीलकंठ = शिवजी, दशानन = रावण, त्रिलोचन = शिवजी, चतुर्भुज = विष्णु ।
नोट : कर्मधारय और बहुब्रीहि में एक से पद होते हैं, किन्तु भेद यह है कि यदि उत्तर पद प्रधान है तो कर्मधारय, यदि कोई पद प्रधान नहीं है अर्थात दोनों गौण हैं तो बहुब्रीहि ।
(5)  द्वंद्व समास – इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं, जैसे – माँ-बाप, भाई-बहन, घी-शक्कर । इसके  विग्रह में जोड़ने  वाले और को लाया जाता है , जैसे - माँ और बाप, घी और शक्कर ।
(6)  अव्ययीभाव समास – इसमें पूर्वपद अव्यय होता है, अतः समस्त पद की रचना को अव्ययीभाव समास रचना कहते हैं, जैसे – प्रतिदिन, यथासमय, आजन्म, आमरण, बेखटके, भरपेट । यहाँ प्रति, यथा, आ, बे, भर सभी अव्यय हैं ।

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