14 Jan 2014

अलंकार : हिन्दी व्याकरण

अलंकार और उसके भेद : हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar)


अलंकार : अलंकार शब्द का शाब्दिक अर्थ है आभूषण या गहना । जिस प्रकार स्त्री के सौन्दर्य वृद्धि में आभूषण सहायक होते हैं , उसी प्रकार काव्य में प्रयुक्त होने वाले अलंकार शब्दों एवं अर्थो की सुन्दरता में वर्द्धि करके चमत्कार उत्पन्न करते हैं ।

प्रमुख अलंकार :
1. अनुप्रास : व्यंजन वर्णों की आवृति एक या दो से अधिक बार होती है ।
उदाहरण – कल कानन कुंडल मोरपखा उर पी बनमाल बिराजति है 
2. यमक : एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए और उसका अर्थ हर बार भिन्न हो ।
उदाहरण : काली घटा का घमण्ड घटा 
घटा = वर्षा काल में आकाश के उमड़ने वाली मेघमाला ।
घटा = कम हुआ।
3. श्लेष : शब्द का अधिक अर्थ में एक ही बार प्रयोग ।
 उदाहरण : मधुवन की छाती को देखो,
                 सूखी कितनी इसकी कलियाँ 
कलियाँ : खिलने से पूर्व फूल की दशा ।
कलियाँ : यौवन पूर्व की दशा ।
4. उपमा : एक वस्तु या प्राणी की तुलना अत्यंत सादृश्य के कारण प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाए ।
उदाहरण : हाय फूल-सी कोमल बच्ची । हुई राख की थी ढेरी ।।
उपमा के चार तत्व होते हैं –
(क)   उपमेय : वह वस्तु या प्राणी जिसकी उपमा दी जाए ।
(ख)  उपमान : वह प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी जिसके साथ उपमेय की तुलना की जाए ।
(ग)   साधारण धर्म : उपमेय तथा उपमान में पाया जाने वाला परस्पर समान गुण ।
(घ)   वाचक शब्द : वे शब्द जो उपमेय और उपमान में पाए जाने वाले गुण को प्रकट करते हैं –ज्यों, जैसा, तुल्य, सा, सी, सरिस आदि ।
5. रूपक : जहाँ गुण की अत्यंत समानता  के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोपण हो ।
उदाहरण : मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों ।
यहाँ चन्द्रमा (उपमेय) में खिलौना (उपमान) का आरोप है ।
6. उत्प्रेक्षा : जहाँ समानता के कारण उपमेय में संभावना या कल्पना की जाए ।
मानो, मनु, मनहु, जानो, जनु, जनहु आदि इसके बोधक शब्द हैं ।
उदाहरण : कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए ।
                   हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए ।
7. अतिशयोक्ति : जहाँ उपमेय का वर्णन लोक सीमा से अधिक बढाकर किया जाए ।
उदाहरण : आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार ।
                   राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार ।
8. अन्योक्ति : जहाँ उपमान (अप्रस्तुत) के वर्णन के माध्यम से उपमेय (प्रस्तुत) का वर्णन किया जाए ।
 उदाहरण : जिन दिन देखे वे कुसुम, गई सु बीती बहार ।
                   अब, अलि रही गुलाब में, अपत कँटीली डार ।

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