14 Jan 2014

समास : हिन्दी व्याकरण

समास और उसके भेद : हिन्दी व्याकरण


(Last Updated : 14.08.2015)
हिन्दी भाषा में शब्दों की रचना कई विधियों से होती है जिसमे से एक रचना विधि है - समास रचना । समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे - पुस्तक + आलय = पुस्तकालय ।

समास : समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक) अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं, जैसे – गंगा+जल = गंगाजल ।
समास रचना में प्रायः दो पद  (शब्द) होते हैं – पहले पद को पूर्वपद (जैसे – गंगा) और दूसरे को उत्तर पद(जैसे – जल) कहते हैं । समास रचना से बने शब्द को समस्त पद (जैसे – गंगाजल) कहते हैं ।
समास विग्रह

समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) को अलग-अलग करने को समास विग्रह कहते हैं, जैसे – गंगाजल = गंगा+जल । अन्य उदाहरण  - चंद्रमुख = चन्द्र-सा मुख ।
समास के भेद :
समास के चार प्रमुख भेद हैं -
(1)  तत्पुरुष समास
(2)  कर्मधारय समास
(3)  द्विगु समास
(4)  बहुब्रीहि समास

इसके अतिरिक्त दो अन्य भेद (कर्मधारय और द्विगु) भी प्रचलित हैं, यद्यपि ये दोनों भेद तत्पुरुष समास के ही उपभेद हैं । इस प्रकार समास के कुल छह भेद हैं जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है :

(1)  तत्पुरुष समास – इस समास में पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान होता है, जैसे – राजकुमार (राजा का कुमार) ।
अन्य उदाहरण : पुस्तकालय, क्रीडाक्षेत्र, घुड़सवार, रसोईघर, हस्तलिखित, वाल्मिकिरचित, सूखापीडित, पथभ्रष्ट, आपबीती, देशवासी, पनचक्की, मालगाड़ी, रेलगाड़ी, दहीबड़ा, बनमानुष ।
इस समास के दो प्रमुख उपभेद हैं – कर्मधारय और द्विगु ।
(2)  कर्मधारय समास – इसमें पूर्वपद विशेषण होता है और उत्तर पद विशेष्य, जैसे – नीलगाय = नील (विशेषण) + गाय (विशेष्य) नीली गाय । अन्य उदाहरण – पीताम्बर, महादेव, कमलनयन, घनश्याम, मुखचन्द्र ।
(3)  द्विगु समास – यह एक प्रकार का कर्मधारय समास है जहाँ विशेषण कोई संख्या है; अर्थ की दृष्टि से यह समास प्रायः समूहवाची होता है, जैसे – तिराहा = ति (तीन) + राहा । अन्य उदाहरण – चौमासा, पंचवटी, शताब्दी, त्रिशूल, त्रिनेत्र ।
(4)  बहुब्रीहि समास – इस समास में न तो उत्तर पद प्रधान होता है और न ही पूर्वपद प्रधान होता है । यहाँ दोनों गौण (उत्तर पद और पूर्वपद) एक तीसरे प्रधान के संबंध में कहते हैं, जो संदर्भ से प्रकट होता है । जैसे – पीताम्बर = पीत+अम्बर (पीला कपडा), लेकिन संदर्भ से यह कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुआ है – पीला है कपडा जिसका वह (कृष्ण) । यहाँ दोनों पद गौण हैं, प्रधान तीसरा पद कृष्ण है । अन्य उदाहरण – नीलकंठ = शिवजी, दशानन = रावण, त्रिलोचन = शिवजी, चतुर्भुज = विष्णु ।
नोट : कर्मधारय और बहुब्रीहि में एक से पद होते हैं, किन्तु भेद यह है कि यदि उत्तर पद प्रधान है तो कर्मधारय, यदि कोई पद प्रधान नहीं है अर्थात दोनों गौण हैं तो बहुब्रीहि ।
(5)  द्वंद्व समास – इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं, जैसे – माँ-बाप, भाई-बहन, घी-शक्कर । इसके  विग्रह में जोड़ने  वाले और को लाया जाता है , जैसे - माँ और बाप, घी और शक्कर ।
(6)  अव्ययीभाव समास – इसमें पूर्वपद अव्यय होता है, अतः समस्त पद की रचना को अव्ययीभाव समास रचना कहते हैं, जैसे – प्रतिदिन, यथासमय, आजन्म, आमरण, बेखटके, भरपेट । यहाँ प्रति, यथा, आ, बे, भर सभी अव्यय हैं ।

0 comments:

Post a Comment

UPTET Answer Key 2017 Paper 1, 2 Exam 15th October Solution @ upbasiceduboard.gov.in

UPTET Answer Key 2017 : Paper 1 & Paper 2 Key Solution 15th October, 2017 (Latest Updated : 18.10.2017). UPTET Answer Key 2017 : Do...


Change Language

Get Latest Updates via Email

Like Us on Facebook

Follow us on Google+